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जमींदार

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जमींदार सिर्फ जमींदार नहीं थे साक्षात् जल्लाद थे, पुरखों की पीठ के निशान इस बात के साक्षी थे। उनके फरमान की अवज्ञा किस्तों में मौत की सज़ा थी, लिहाजा अमल करने के सिवाय कोई चारा नहीं था। केवल यही था ...

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dk bhaskar

एडवोकेट एवं सम्पादक डिप्रेस्ड एक्सप्रेस, मथुरा।

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