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इंसानियत

4.7
1557

तोते ने मैना से कहा -" जानती हो! इंसान जानवर हो गया है,और जानवरों में इंसानियत आ गई है। " " अच्छा! कैसे? " मैना ने कौतूहल से पूछा। " आज मैंने देखा,सड़क पर सरे-आम हाथ में रिवाल्वर लिए,चार-पाँच गुंडे एक ...

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लेखक के बारे में

विजयानंद विजय पता - आनंद निकेत बाजार समिति रोड पो. - गजाधरगंज बक्सर ( बिहार ) - 802103 जन्म तिथि - 1 जनवरी 1966 शिक्षा - एम.एस-सी; एम.एड्; एम.ए. (हिंदी) संप्रति - अध्यापन (राजकीय सेवा)। निवास - बोधगया, बिहार उपलब्धियाँ - विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय पत्र - पत्रिकाओं में कहानी, कविता, व्यंग्य व लघुकथाएँ नियमित रूप से प्रकाशित।

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    01 जनवरी 2020
    अत्यन्त ही सारगर्भित ।
  • author
    Shekhar Bhardwaj
    12 मार्च 2018
    haa ...sach to hai..
  • author
    aniketmadhusudan patel "Patel"
    24 अगस्त 2021
    बहुत बहुत बढ़िया है
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    अरविन्द सिन्हा
    01 जनवरी 2020
    अत्यन्त ही सारगर्भित ।
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    Shekhar Bhardwaj
    12 मार्च 2018
    haa ...sach to hai..
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    aniketmadhusudan patel "Patel"
    24 अगस्त 2021
    बहुत बहुत बढ़िया है