पापा, आपको नहला धुलाकर नए कपड़े पहना दिए हैं | लकड़ी की सीढ़ीनुमा चीज पर लिटाया गया है जिसे शायद अर्थी कह्ते हैं | माँ को उलाहने दिए जा रहे हैँ | ‘दैया रे, कैसी महरारू है ? एक आंसू न गिरा |’ ताई ...

प्रतिलिपिपापा, आपको नहला धुलाकर नए कपड़े पहना दिए हैं | लकड़ी की सीढ़ीनुमा चीज पर लिटाया गया है जिसे शायद अर्थी कह्ते हैं | माँ को उलाहने दिए जा रहे हैँ | ‘दैया रे, कैसी महरारू है ? एक आंसू न गिरा |’ ताई ...