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Hawas ki pyas

4.5
40

हवस की प्यास..... रात में जाने से डरने लगी क़्युकि रास्ते में कहीं किसी दरिंदे को उसे देख हवस  की प्यास ना लग जाए.... रात काली ,  लिबास काला हवसियों के अंदर बैठी उनकी आत्मा भी काली,,,,अब तो वह वहां जाना चाहती है जो उसे न सहना पड़े मोहल्ले वालों के ताने..और न सहना पड़े यह हवसियों की प्यासके जुलम,  अब हवसियत इस कदर अपने रंग दिखाने लगी की प्यास उसकी बुझने ना आई और जाने क्यों उसे अपनों ने डसा कभी खुद  के बाप ने उसे दबोचा,,तो कभी खुद की मां ने उसे बाजारू बना दिया ,,तो कभी दोस्तों ने प्यास बुझाई ...

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Ashish Pandey

Author President/founder = the youth team of India (ngo) Sports player Poet I'm not important for my self

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