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हां, वो एक वेश्या थी

4.2
1221

कामिनी, पुंश्चली, गणिका, कुंभदासी, देवदासी, रुपाजीवा..... अनेक नाम थे उसके कुछ साहित्यकार उसे शिल्पकारिका तो कुछ तवायफ के नाम से जानते थे।। कुदरत के निर्माण नियमों से पूर्णतः उलट दिन के समय काजल...

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लेखक के बारे में

दोस्तों, जिन्दगी की भागदौड़ ने बंजारा बना दिया है। वक्त किसी के साथ ज्यादा समय रूकने नहीं देता और दिल किसी को छोड़ना नहीं चाहता। बस इन्हीं उलझे हुए लम्हात को कुछ अनकहे शब्दों से सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं और मैं "उत्तम दिनोदिया" आपसे, मेरे इन अनकहे शब्दों के सफर में साथ चाहता हूं.... https://m.facebook.com/renuttam/

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Deepali Gupta
    01 जनवरी 2023
    बहुत ही अच्छी सोच के साथ लिखी हुई कविता है बहुत ही सुंदर शब्दों का प्रयोग किया है
  • author
    SAtya Mahra
    15 सितम्बर 2020
    बहुत ही सुन्दर रचना, समाज की अराजकता को चित्रित करने के लिए धन्यवाद ।
  • author
    Shilpi Manjari
    16 अक्टूबर 2019
    मन को झकझोरती; एक नूतन और पावन सोच लिए, सक्षम-सशक्त काव्य चिंतन
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    Deepali Gupta
    01 जनवरी 2023
    बहुत ही अच्छी सोच के साथ लिखी हुई कविता है बहुत ही सुंदर शब्दों का प्रयोग किया है
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    SAtya Mahra
    15 सितम्बर 2020
    बहुत ही सुन्दर रचना, समाज की अराजकता को चित्रित करने के लिए धन्यवाद ।
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    Shilpi Manjari
    16 अक्टूबर 2019
    मन को झकझोरती; एक नूतन और पावन सोच लिए, सक्षम-सशक्त काव्य चिंतन