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गुरुदेव कौ अंग

4.6
1014

सतगुर सवाँन को सगा, सोधी सईं न दाति। हरिजी सवाँन को हितू, हरिजन सईं न जाति॥1॥ बलिहारी गुर आपणैं द्यौं हाड़ी कै बार। जिनि मानिष तैं देवता, करत न लागी बार॥2॥ सतगुर की महिमा, अनँत, अनँत किया उपगार। लोचन...

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लेखक के बारे में
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कबीर
समीक्षा
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  • author
    Vivek Kumar Rajput
    05 नवम्बर 2018
    the great ever
  • author
    DK Vajpayee
    12 नवम्बर 2017
    the way of true life
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    Vivek Kumar Rajput
    05 नवम्बर 2018
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    DK Vajpayee
    12 नवम्बर 2017
    the way of true life