"भीषण गर्मी में दोपहर के तकरीबन दो बजे मैं कॉलेज जाने वाले मुख्य मार्ग के चौराहे पर में अपने परम मित्र का इंतजार कर रहा था। तभी मैं देखता हूँ कि मेरे तरफ आ रही एक नौजवान लड़की अचानक मेरे चरण को ...
"" स्वरचित रचनाएं, कहानियाँ ओर अन्य लेख जो कि जीवन के हर स्तर पर आधारित लिखता रहता हूँ। वो भी सरल एवं सीधे शब्दों में लिखने की कोशिश करता हूँ।""★★★
●-● पूर्णतया सर्वाधिकार सुरक्षित हैं। ●-●
सारांश
"" स्वरचित रचनाएं, कहानियाँ ओर अन्य लेख जो कि जीवन के हर स्तर पर आधारित लिखता रहता हूँ। वो भी सरल एवं सीधे शब्दों में लिखने की कोशिश करता हूँ।""★★★
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बधाई हो! गुरु के चरणों में प्रणाम दोनों हाथों से शीश झुकाकर प्रकाशित हो चुकी है।. अपने दोस्तों को इस खुशी में शामिल करे और उनकी राय जाने।