जिम्मेदारियां मजबुर कर देती हैं अपना शहर छोड़ने को वरना कौन अपनी गली में जीना नहीं चाहता......
सारांश
जिम्मेदारियां मजबुर कर देती हैं अपना शहर छोड़ने को वरना कौन अपनी गली में जीना नहीं चाहता......
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बधाई हो! गुलाम बन कर जियोगे तो कुत्ता समझकर लात मारेगी ये दुनिया । नवाब बनकर जियो तो शेर समझकर सलाम ठोकेगी दुनिया- प्रकाशित हो चुकी है।. अपने दोस्तों को इस खुशी में शामिल करे और उनकी राय जाने।