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गोपिया देती ऊलहाना

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ऊलहाना सुन सुन कान थक गए अब तो यशोदा मां के कान खींच समझाती मैया देखो अपने कान्हा को मैं तोहे देती माखन मिश्री काहे करता चोरी मेरी बात को समझो कान्हा अब तो थोड़ी-थोड़ी सारी गोपियां मिथ्या बोले ...

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Soni Jha

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