बाद अरसे के मिले हो न यूं देखो हमको.. नहीं बदले ज़रा भी हम कि फ़कत एक क़तरा.. आज़ भी है वही सूरत वही सीरत है अब भी.. तुझे खोने का डर और वही आशक़ी है.. हैं कुछ शोख़ तमन्नां कुछ हैं टूटे अरमां.. ...

प्रतिलिपिबाद अरसे के मिले हो न यूं देखो हमको.. नहीं बदले ज़रा भी हम कि फ़कत एक क़तरा.. आज़ भी है वही सूरत वही सीरत है अब भी.. तुझे खोने का डर और वही आशक़ी है.. हैं कुछ शोख़ तमन्नां कुछ हैं टूटे अरमां.. ...