pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

फिर मैं समझा

1

थका हुआ है, यह तू जानता है दुनियाँ नहिं खोया हुआ है, यह तू जानता है दुनियाँ नहिं दिखा दे उस आईने को जो पूछता तुझसे हर समय है सुलझा दे उस सवाल को जो उलझाता तुझे हर समय है झाँक जरा अपने अंदर कैसा...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Sahitya Lehri

“Ek chhoti si kalamkar jo apne shabdon se zindagi ke rang sametne ki koshish karti hai. Kavitaayein aur kahaniyaan meri rooh ki awaaz hain, jinhe main aap sab ke saath baantna chahti hoon.”

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है
  • author
    आपकी रेटिंग

  • रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है