pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

कन्या भ्रूण हत्या

4.9
538

करनी हैं बातें तुझसे मुझे हज़ार , क्यों छीना है तुमने मुझसे , मेरे जीने का अधिकार , मेरे जीने का अधिकार । दया तुम्हें तनिक नहीं आई, नन्ही सी जान की हत्या कराई, क्या बीत रही होगी मुझ पर, तनिक न ...

अभी पढ़ें

Hurray!
Pratilipi has launched iOS App

Become the first few to get the App.

Download App
ios
लेखक के बारे में
author
Sayyeda Khatoon

समाज में फैली कुरूतियों और औरतों पर होते हुए अत्याचार को जब- जब पढ़ती देखती और सुनती हूँ मन द्रवित हो जाता है। उनके लिए कुछ न कर पाने की कसक मे स्वत: ही मेरी लेखनी कुछ लिख डालने पर तत्पर हो जाती है । मेरी कविताएँ लेख व टिप्पणियाँ मैगज़ीन का हिस्सा बनती रही है।प्रतिलिपि में प्रकाशित मेरी कविताएँ कन्या भ्रूण हत्या, हमारी फरीयाद,मज़दूर और माँ अनेक मैगज़ीन का हिस्सा बनती रही हैं। ड्रेस डिजाइनिंग, पेंटिंग, चित्रकारी, कढ़ाई- बुनाई व कुकिंग में मेरी बड़ी रूचि है या यूँ समझ ले कि इन क्षेत्रों में मेरी अच्छी पकड़ है। आप सभी का सहयोग व समीक्षाएँ मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है । मेरा निवास स्थान अब उत्तराखंड है 😊😊

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    03 जनवरी 2019
    जी, बेहतरीन रचना आ0 बेटियां तो सौभाग्य होता है माता पिता का। लेकिन कुछ बेसमझ, निहायती संकीर्ण मानसिकता वाले लोग इस बात को नही समझते है। वो पहले ही कयास लगा लेते है कि बड़ी होकर अच्छा घर मिलेगा के नहीं मिलेगा। हमारा नाम ही खराब न कर दे कहीं। पर ये गलत है आप अपनी बेटी को जैसी शिक्षा देंगे वो वैसी ही बनेगी। ऐसी मानसिकता वाले लोगो को शायद अपनी परवरिश पर ही विश्वास नहीं होता है। वास्तव में बहुत ही खूब लिखा है आपने आदरणीया नमन है आपको और आपकी कलम को।आदरणीया आप समय निकालकर मेरी रचनाएँ 'आक्रन्ति' व 'डर' भी पढ़ सकती है।
  • author
    Gulab Gadade
    14 जून 2018
    मन को छुलीया आपकी कविता पढने के बाद मुझे अपने फैसले पे खुशी होरही है.. मुझे एक लडका ओर एक लड़की है। पहले लडके के बाद देड साल मे मेरी पत्नी फिर से माँ बने वाली थी। मेरी पत्नी को किसने कहा कि इतने जल्दी दुसरा बच्चा पैदा मत करो. उसने मुझे बच्चों को गिराने को कह मैने उसको समज्या अगर बच्ची रहीतो मै अपने बच्ची को तुकडे करने नहीं दुंगा ओर लडकी ही हुई। मै अपने फैसले पे खुश हूं.....
  • author
    Dr Sushil Chandra Gupta "Gupta"
    26 अक्टूबर 2021
    शुभ संध्या कन्या भ्रूण पर आधारित आपकी सुंदर कविता पढ़ें बधाई आप भी मेरी रचनाओं को पढ़कर अपनी सुंदर समीक्षाएं दे वर्तमान में धारावाहिक उपन्यास लल्लन प्रकाशित हो रहा है उसे पढ़कर भी सुंदर समीक्षाएं अवश्य दें धन्यवाद
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    03 जनवरी 2019
    जी, बेहतरीन रचना आ0 बेटियां तो सौभाग्य होता है माता पिता का। लेकिन कुछ बेसमझ, निहायती संकीर्ण मानसिकता वाले लोग इस बात को नही समझते है। वो पहले ही कयास लगा लेते है कि बड़ी होकर अच्छा घर मिलेगा के नहीं मिलेगा। हमारा नाम ही खराब न कर दे कहीं। पर ये गलत है आप अपनी बेटी को जैसी शिक्षा देंगे वो वैसी ही बनेगी। ऐसी मानसिकता वाले लोगो को शायद अपनी परवरिश पर ही विश्वास नहीं होता है। वास्तव में बहुत ही खूब लिखा है आपने आदरणीया नमन है आपको और आपकी कलम को।आदरणीया आप समय निकालकर मेरी रचनाएँ 'आक्रन्ति' व 'डर' भी पढ़ सकती है।
  • author
    Gulab Gadade
    14 जून 2018
    मन को छुलीया आपकी कविता पढने के बाद मुझे अपने फैसले पे खुशी होरही है.. मुझे एक लडका ओर एक लड़की है। पहले लडके के बाद देड साल मे मेरी पत्नी फिर से माँ बने वाली थी। मेरी पत्नी को किसने कहा कि इतने जल्दी दुसरा बच्चा पैदा मत करो. उसने मुझे बच्चों को गिराने को कह मैने उसको समज्या अगर बच्ची रहीतो मै अपने बच्ची को तुकडे करने नहीं दुंगा ओर लडकी ही हुई। मै अपने फैसले पे खुश हूं.....
  • author
    Dr Sushil Chandra Gupta "Gupta"
    26 अक्टूबर 2021
    शुभ संध्या कन्या भ्रूण पर आधारित आपकी सुंदर कविता पढ़ें बधाई आप भी मेरी रचनाओं को पढ़कर अपनी सुंदर समीक्षाएं दे वर्तमान में धारावाहिक उपन्यास लल्लन प्रकाशित हो रहा है उसे पढ़कर भी सुंदर समीक्षाएं अवश्य दें धन्यवाद