हमारी जिदंगी के कुछ किरदार हमसे इस कदर जुङ जाते है की हम चाहकर भी उनसे अलग नहीँ हो पाते है। वो हमारी जिँदगी का एक अटूट हिस्सा बन कर रह जाते है। "तनयराज.... उफ्फ! कौन हैँ ये रॉस्कल... कितनी बार डिलीट...

प्रतिलिपिहमारी जिदंगी के कुछ किरदार हमसे इस कदर जुङ जाते है की हम चाहकर भी उनसे अलग नहीँ हो पाते है। वो हमारी जिँदगी का एक अटूट हिस्सा बन कर रह जाते है। "तनयराज.... उफ्फ! कौन हैँ ये रॉस्कल... कितनी बार डिलीट...