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दो प्रेमी

4.6
7156

दो प्रेमी.. जंगली कहीं की... आकाश बुदगबुदाया... "हां मैं हूं जंगली ! पर तुम से तो लाख गुना अच्छी हूं.. तुम्हारे सीने में तो दिल ही नहीं है । आंसुओं के साथ जबरन बाहर आने को बेताब बहती नाक को ...

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लेखक के बारे में
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विद्या शर्मा

जन्म स्थान. प्रयागराज उत्तर प्रदेश 🌎 Women health and hygiene councillor अनेक पत्र-पत्रिकाओं एवं साहित्यिक मंच पर रचनाओं का प्रकाशन.📒 नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से फेसबुक पर भी मुझे फॉलो करें https://www.facebook.com/viddya.sharma.75?mibextid=ZbWKwL For instagram -https://www.instagram.com/vidya_sharma79?igsh=MW54NWxmaXA2d2Q2bQ==

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    sushma gupta
    19 दिसम्बर 2019
    प्रेमी जोड़े की मीठी मीठी प्यारी सी तकरार से शुरू हुई कहानी अंत तक पहुंचते पहुंचते बहुत उत्तम संदेश दे गई 💐💐💐💐💐बहुत ही रोचक शैली में लिखी गई पर्यावरण संरक्षण की लाजवाब कहानी 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐💐💐💐
  • author
    Yaduvansh Sudhir
    28 दिसम्बर 2019
    बहुत ही मार्मिक रचना यह हमारे लिए प्रेरणा है हमारे समाज को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए हमें आपस में प्रेम के साथ-साथ प्रकृति को भी उतना ही प्रेम देना चाहिए जितना हम आपस में चाहते हैं या एक दूसरे से उम्मीद करते हैं।क्योंकि प्रकृति के बिना तो हमारा जीवन निरर्थक नीरस हो जाता हैप्रेम की शुद्धता पाने के लिए प्रकृति की भी शुद्धता अत्यावश्यक है इसलिए हमें प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिससे हमारे प्रकृति शुद्ध व स्वस्थ रहें। जिससे हम स्वस्थ रहेंगे और स्वस्थ मस्तिष्क में ही शुद्ध विचारों का उद्गम होता है। आपका बहुत-बहुत आभार ऐसी प्रेरक रचना लिखने के लिए आपका शब्द चयन बहुत ही उच्च कोटि का है।
  • author
    Mrs Shruti Sharma
    26 दिसम्बर 2019
    आपकी रचना बहुत ही खुबसूरत संदेश दे रही है।वर्तमान में हमें अपने युवाओं को जगरूक करने की जरूरत है ताकि भविष्य में हम अपनी प्राकृति रूपी अचल संपत्ति को सहेज कर रख सके।
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    sushma gupta
    19 दिसम्बर 2019
    प्रेमी जोड़े की मीठी मीठी प्यारी सी तकरार से शुरू हुई कहानी अंत तक पहुंचते पहुंचते बहुत उत्तम संदेश दे गई 💐💐💐💐💐बहुत ही रोचक शैली में लिखी गई पर्यावरण संरक्षण की लाजवाब कहानी 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💐💐💐💐💐💐💐💐
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    Yaduvansh Sudhir
    28 दिसम्बर 2019
    बहुत ही मार्मिक रचना यह हमारे लिए प्रेरणा है हमारे समाज को भी इससे प्रेरणा लेनी चाहिए हमें आपस में प्रेम के साथ-साथ प्रकृति को भी उतना ही प्रेम देना चाहिए जितना हम आपस में चाहते हैं या एक दूसरे से उम्मीद करते हैं।क्योंकि प्रकृति के बिना तो हमारा जीवन निरर्थक नीरस हो जाता हैप्रेम की शुद्धता पाने के लिए प्रकृति की भी शुद्धता अत्यावश्यक है इसलिए हमें प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों का प्रयोग नहीं करना चाहिए जिससे हमारे प्रकृति शुद्ध व स्वस्थ रहें। जिससे हम स्वस्थ रहेंगे और स्वस्थ मस्तिष्क में ही शुद्ध विचारों का उद्गम होता है। आपका बहुत-बहुत आभार ऐसी प्रेरक रचना लिखने के लिए आपका शब्द चयन बहुत ही उच्च कोटि का है।
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    Mrs Shruti Sharma
    26 दिसम्बर 2019
    आपकी रचना बहुत ही खुबसूरत संदेश दे रही है।वर्तमान में हमें अपने युवाओं को जगरूक करने की जरूरत है ताकि भविष्य में हम अपनी प्राकृति रूपी अचल संपत्ति को सहेज कर रख सके।