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धीरे -धीरे

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4.1

कुछ खो दिया मैंने....पर क्या? ये कैसी कसक उठी है दिल मे... हाथो से कुछ तो झुटता जा रहा है..पर क्या कई दिन गुज़र गए ,कई शाम गुज़र गए.... उन बातों का सिलसिला थम गया ..... जो हम दोनों को बहुत पास लेकर आते...