दर्द भी गुज़रती रात का सिला देता है तमाम उम्र गुज़ारने की वजह देता है बेरुखी को हाथों से मल रहा है मौसम मुझे वो अंधेरे से मिला देता है हर लम्हा खर्च हो रहा है आजकल शाम का मुकद्दर मुझे जला देता है...
मैं राजेश बलूनी ,मूलतः,उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले का निवासी हूँ ,कविता लेखन और गायन की बालयावस्था से ही रुचि रही है ,जब भी मन में कोई विचार आता है ,तो कागज़ की सतह पर लिख देता हूँ,बहुत सी त्रुटियां होंगी रचनाओं में ,अतः यह नौसिखिया आपसे उसके लिए सदैव क्षमाप्रार्थी है,सुझावों का सदा ही स्वागत है
सारांश
मैं राजेश बलूनी ,मूलतः,उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले का निवासी हूँ ,कविता लेखन और गायन की बालयावस्था से ही रुचि रही है ,जब भी मन में कोई विचार आता है ,तो कागज़ की सतह पर लिख देता हूँ,बहुत सी त्रुटियां होंगी रचनाओं में ,अतः यह नौसिखिया आपसे उसके लिए सदैव क्षमाप्रार्थी है,सुझावों का सदा ही स्वागत है
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या