pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

दफा 302 ( बापू तेरे लिए)

6

हर दर्द को झेला है , बापू तूने मेरे लिए, मेरी खुशी की खातिर ,हर दर्द झेला है तूने। तुम मेरी मजबूती हो बापू , तेरे बिना मैं कुछ भी नहीं, ये ख्वाहिशें , ये सपने, बिन तेरे कुछ भी नहीं। तुम मेरे ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
सौरभ कुमार

मजबुर रहे दोनों, अपने अपने दायरे में एक इश्क़ कर ना सका, एक इश्क़ भुला ना सका।

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है
  • author
    आपकी रेटिंग

  • रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है