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दाढ़ी के रखैयन (कवि भूषण)

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दाढ़ी के रखैयन की दाढ़ी सी रहत छाती             बाढ़ी मरजाद जसहद्द हिंदुवाने की कढ़ी गईं रैयत के मन की कसक सब             मिटि गईं ठसक तमाम तुकराने की भूषण भनत दिल्लीपति दिल धक धक             ...

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लेखक के बारे में
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Prof INDU SINGH

भूतपूर्व प्रवक्ता विवेकानन्द डिग्री कॉलेज, हैदराबाद (अलग-अलग विद्यालयों एवं कॉलेज में लगभग 12 वर्षों का शिक्षण अनुभव)

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