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चिट्ठी

4.4
1588

कुटिया पर मुझे साढ़े-साते बजे तक पहुँच जाना था और सात बज गए थे। एक तो मेरी जेब में रिक्शे-भर के लिए मुद्रा नहीं थी, दूसरे आज इस जाड़े की पहली बारिश हुई थी और इस समय रात के सात बजे तेज हवा थी। जाड़े में ...

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लेखक के बारे में
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अखिलेश

जन्म : 6 जुलाई 1960, सुल्तानपुर (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिंदी विधाएँ : कहानी, उपन्यास, संस्मरण, संपादन मुख्य कृतियाँ कहानी संग्रह :  अँधेरा, आदमी नहीं टूटता, मुक्ति, शापग्रस्त उपन्यास : अन्वेषण, निर्वासन संस्मरण : वह जो यथार्थ था संपादन : तद्भव (अनियतकालीन पत्रिका), श्रीलाल शुक्ल की दुनिया (श्रीलाल शुक्ल के रचनाकर्म पर एकाग्र), एक किताब एक कहानी (किताबों की एक श्रृंखला), दस बेमिसाल प्रेम कहानियाँ, कहानियाँ रिश्तों की (रिश्ते-नातों पर आधारित ग्यारह किताबों की एक श्रृंखला) सम्मान श्रीकांत वर्मा पुरस्कार, वनमाली कथा पुरस्कार, इंदु शर्मा कथा सम्मान, परिमल सम्मान, अयोध्या प्रसाद खत्री पुरस्कार, स्पंदन सृजनात्मक पत्रकारिता पुरस्कार, राजकमल प्रकाशन कृति सम्मान : ‘कसप’ - मनोहर श्याम जोशी पुरस्कार , कथाक्रम  पुरस्कार

समीक्षा
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  • author
    दया शंकर शरण
    05 मे 2020
    जब कोई कथा अपनी समाप्ति के साथ पाठक की संवेदना को छू ले , तो यही उसकी सार्थकता है-ऐसा मुझे लगता है । अपने तमाम फक्कडंपन को लिए जिंदगी के मूल्यों,सिद्धांतों और अपनी शर्तों पर जीने-मरने की जिद और एक तरह का अक्खड़पन इस कहानी के सभी पात्रों जो स्वभाव से समानधर्मा हैं -उनका विखरना दिल को छू लेता है । इस 'चिट्ठी' के लिए आपको साधुवाद !
  • author
    Ashutosh
    13 मे 2017
    bahot hi ummda rachna......
  • author
    Sarita Upadhyay
    24 जुलै 2021
    aaj kal ki satyata
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    दया शंकर शरण
    05 मे 2020
    जब कोई कथा अपनी समाप्ति के साथ पाठक की संवेदना को छू ले , तो यही उसकी सार्थकता है-ऐसा मुझे लगता है । अपने तमाम फक्कडंपन को लिए जिंदगी के मूल्यों,सिद्धांतों और अपनी शर्तों पर जीने-मरने की जिद और एक तरह का अक्खड़पन इस कहानी के सभी पात्रों जो स्वभाव से समानधर्मा हैं -उनका विखरना दिल को छू लेता है । इस 'चिट्ठी' के लिए आपको साधुवाद !
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    Ashutosh
    13 मे 2017
    bahot hi ummda rachna......
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    Sarita Upadhyay
    24 जुलै 2021
    aaj kal ki satyata