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छाँव के सुख भोग पथिक

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4.4

यह पूरी जीवन यात्रा छाँव खोजने की यात्रा है। जीवन की चिलचिलाती धूप में चलते - चलते जब पथिक थक जाता है, तो छाँव का छोटा सा टुकड़ा भी कितना सुख देता है, उसे शब्दों में बयाँ नही किया जा सकता। इस ...