वृक्ष की शाखों पर ताज़ी ,सुकोमल पत्तियाँ लहरा रही थीं। अच्छी लग रही थी कोमल,सुरभित बयार !उसने एक चक्कर पूरे बगीचे का काट लिया था और अब वह थक गया था । वैसे थकना उसके स्वभाव में नहीं था फिर भी शरीर है ...

प्रतिलिपिवृक्ष की शाखों पर ताज़ी ,सुकोमल पत्तियाँ लहरा रही थीं। अच्छी लग रही थी कोमल,सुरभित बयार !उसने एक चक्कर पूरे बगीचे का काट लिया था और अब वह थक गया था । वैसे थकना उसके स्वभाव में नहीं था फिर भी शरीर है ...