pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

"चापलूसी जीवन के मायने"

11

आज के समय में हर इंसान स्वतंत्र रहना चाहता है यह उसका नेचुरल स्वभाव है लेकिन यदि कोई मनुष्य अपने स्वभाव को भूलकर,अपने विवेक व बुद्धि का परित्याग कर देता है,तो ऐसे मानव का विकास कैसे होगा? क्या ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Mohan Prakash

गुरु कृपा

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है
  • author
    आपकी रेटिंग

  • रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है