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चाँद को समेटने की चाहत में ,तारों सा टूट जाता हूँ!

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किसी नये का ख्याल मन में लाता हूँ खुद को बहुत समझाता हूँ सहेजता हूँ फूलों के गमले को सूखे पत्ते सा टूट जाता हूँ! कभी पास आता हूँ कभी दूर जाता हूँ झूठे वादों से दिल को बहलाता हूँ! तुम आस से थे प्यास...

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Khushi Mishra
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