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चक्रवर्ती सम्राट रघु

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🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 स्वर्ण-शिखर पर सूर्यकुल के दीप्त हुआ एक दिव्य प्रभात, जिसकी ज्योति से आलोकित हो उठता था भू-नभ-विस्तार। जिसकी कीर्ति-सुधा की धारा बहती युग-युग अविराम, जिसके यश का जयघोष आज भी गूँज...

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Shiv kruti Knowledge point

जब से पिया है तेरे रूप का प्याला, चढ़ा मुझ पर ऐसा हाला। संसार सारा देख लिया, कहीं कोई तुम सा ना दिखा।

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