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ब्लैक एंड वाइट

4.3
13445

यह ब्लैक एंड वाइट फ़िल्मों का दौर था मगर मोहतरमा की रंगीन दिलक़श अदाएं ग़ज़ब ढ़ा रही थीं। सुमित्रा देवी लाखों-करोड़ों जवान दिलों की धड़कन बन चुकी थी।जब वह एस्टन मार्टिन कार से उतरती तो लोग उसके ...

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लेखक के बारे में
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राजेश मंथन

बॉलीवुड में फ़िल्म गीतकार की हैसियत से सक्रिय ! "मंथन " उपनाम से ' चलो दिल्ली '(लारा दत्ता,अक्षय कुमार,विनय पाठक) '"आय मी और मैं" (जॉन अब्राहम, चित्रांगदा सिंह), "एनिमी "( सुनील शेट्टी, के.के.मेनन,मिथुन चक्रवर्ती), "हेल्प" (बॉबी देओल, मुग्धा गोडसे)" टाइम टू डांस(सूरज पंचोली,इज़ाबेल कैफ),फ़ौजी कॉलिंग( शरमन जोशी, बिदिता बाग़),नील नितिन मुकेश अभिनीत फिल्म *दशहरा* जैसी फिल्मों में गीत लिखे। इसके अलावा *चेस, *कुछ करिये'* "बस एक तमन्ना", इश्क़ के परिंदे, *तेरी भाभी है पगले*, *हामिद* और *बा बा ब्लैक शीप * ये है इंडिया *और चिकन करी लॉ *आदि फ़िल्मों के लिए भी गीत दिए। प्लेबैक सिंगर #शान # के म्यूजिक वीडियोज़ के लिए *तू मेरा रब है,बावरी और रँग ले लिरिक्स, सुनिधि चौहान के म्यूजिक वीडियो के लिए "ये रंजिशें" गायिका ग्वेन अथैड के साथ शान के एक और म्यूजिक एल्बम "सतरंगी" तथा # अनाया ब्रहम्मा के लिए सूफ़ी गीत "लगन लागी " लिखा। फिल्म दशहरा के गीत "ऐ री माई रे" के लिए मिर्ची म्यूजिक अवार्ड्स 2019 के लिए नॉमिनेटेड। 2022 में *भीनी भीनी सी* गीत के लिए मिर्ची म्यूजिक अवार्ड हासिल किया।जिसे सोनू निगम ने गाया और विजय वर्मा ने संगीतबद्ध किया। मूल जन्म स्थान मथुरा उ.प्र.! ख़ैर डिग्री कॉलेज,अलीगढ़ से स्नातक। कई पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।फ़ितरत यायावर और फ़कीराना। फ़ुर्सत के पल ग़ज़लें ,कविताएं और कहानियाँ लिखकर गुज़रते हैं। सम्पर्क- 09769566244, 08850429055

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    Renu Singh
    17 డిసెంబరు 2018
    👍
  • author
    shalini anjum
    30 ఏప్రిల్ 2018
    बहुत ख़ूब ! इस कहानी ने black and white फ़िल्मों के क्लासिक युग को फिर से आँखों के सामने ला खड़ा किया। ऐसा लगता है जैसे सारे किरदारों को बड़े परदे पर देख रहे हैं। अंत में मन दुखी भी हुआ ।
  • author
    03 మే 2018
    महोदय! क्या कहूँ, शब्द नहीं हैं। वैसे बहुत अच्छी कहानी है। कितनी सच्ची है ये तो नहीं पता, पर लेखन शैली और कथानक दोनों ही जबरजस्त हैं।
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    Renu Singh
    17 డిసెంబరు 2018
    👍
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    shalini anjum
    30 ఏప్రిల్ 2018
    बहुत ख़ूब ! इस कहानी ने black and white फ़िल्मों के क्लासिक युग को फिर से आँखों के सामने ला खड़ा किया। ऐसा लगता है जैसे सारे किरदारों को बड़े परदे पर देख रहे हैं। अंत में मन दुखी भी हुआ ।
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    03 మే 2018
    महोदय! क्या कहूँ, शब्द नहीं हैं। वैसे बहुत अच्छी कहानी है। कितनी सच्ची है ये तो नहीं पता, पर लेखन शैली और कथानक दोनों ही जबरजस्त हैं।