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बिठाई जाएंगी परदे में बीबियाँ कब तक

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621

बिठाई जाएंगी परदे में बीबियाँ कब तक बने रहोगे तुम इस मुल्क में मियाँ कब तक हरम-सरा की हिफ़ाज़त को तेग़ ही न रही तो काम देंगी यह चिलमन की तितलियाँ कब तक मियाँ से बीबी हैं, परदा है उनको फ़र्ज़ ...

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लेखक के बारे में

मूल नाम : अकबर हुस्सैन रिज़वी उपनाम : अकबर अलाहाबादी जन्म : 16 नवंबर 1846 देहावसान: 15 फरवरी 1921 भाषा : उर्दू विधाएँ : ग़ज़ल, शायरी अकबर अलाहाबादी उर्दू व्यंग्य के अग्रणी रचनाकारों में से एक हैं, इनके काफी शेरों एवम ग़ज़लों में सामाजिक दर्द को सरल भाषा में हास्यपूर्क ढंग से उकेरा गया है। "हंगामा है क्यूं बरपा" इनकी मशहूर ग़ज़लों में से एक है

समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    04 मई 2019
    लाजवाब.. बहुत खूब..great creation 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
  • author
    Mandeep kaur
    09 मई 2022
    Thank You
  • author
    Vidhya Devi
    15 जून 2020
    umdatreen
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    04 मई 2019
    लाजवाब.. बहुत खूब..great creation 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
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    Mandeep kaur
    09 मई 2022
    Thank You
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    Vidhya Devi
    15 जून 2020
    umdatreen