pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

भीष्म पितामह की भीषण प्रतिज्ञा

4
8

राजपाट भोग वैभव को छोड़ दिया पितृ के भोग ऐश्वर्य की वासना में ली प्रतिज्ञा आजीवन ब्रह्मचर्य की राष्ट्रभक्ति निभाने की कामना में। वक्त तो मौन के साथ चलता है इसलिए मन के साथ भीष्म होना पड़ता है ...

अभी पढ़ें
लेखक के बारे में
author
Ramraj Singh
समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है
  • author
    आपकी रेटिंग

  • रचना पर कोई टिप्पणी नहीं है