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भक्ति या ढोंग

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करो आरती, दीप जलाओ या फिर गाओ मन्त्र, चाहे घंटी ख़ूब बजाओ कर लो सारे तंत्र, क्या ईश्वर ख़ुश हो पायेगा, देख तुम्हारा ढोंग, ग़र दिमाग़ में चलते रहते हैं केवल षड्यंत्र। ✍🏻 रोहित ...

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लेखक के बारे में
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रोहित आर्य

शहीदों के गुलामी छोड़ते अरमान लिक्खूं मैं, कि भारत देश का प्राचीन, गौरव गान लिक्खूं मैं, ये मेरी लेखनी जब-जब लिखे तो हे मेरे ईश्वर!, हरेक दिल में, हरेक धड़कन में, हिन्दुस्तान लिक्खूं मैं।।

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