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बेटी

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4.7

बेटी नहीं है कोई बोझ, फिर क्यूँ कोख में मरे ये रोज? ईश्वर का वरदान है बेटी, सकल गुणों की खान है बेटी, मात-पिता की जान है बेटी, बेटों से भी महान है बेटी! घर को स्वर्ग बनाती बेटी गम में भी मुस्काती...