pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

आज़ाद पंछी

14
5

आज मैं बहुत खुश हूं, क्योंकि अब मैं आजाद हूं, उन्मुक्त गगन में उड़ने के लिए, मुझसे पूछो गुलामी क्या होती है, वो छटपटाहट,वो तड़प ऐसा लगता था, मानो मेरे पंख काट दिए गए हो, मुझे गुलामी की जंजीरों में ...