कौवे के सामने भला, नन्हीं कैसे टिक पाती? सोचा था सहयोग मिलेगा, और बढेगी ख्याति। लेकिन उसको कहां पता है, दुनियां का दस्तूर। ऊपर उठते को दुनियां नीचे खींचती जरुर॥ पर्वत पर चढना हो तो, सांसे तो फूलेगी ...
कौवे के सामने भला, नन्हीं कैसे टिक पाती? सोचा था सहयोग मिलेगा, और बढेगी ख्याति। लेकिन उसको कहां पता है, दुनियां का दस्तूर। ऊपर उठते को दुनियां नीचे खींचती जरुर॥ पर्वत पर चढना हो तो, सांसे तो फूलेगी ...