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अति सर्वत्र वर्जयेत्

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ओम् अर्हम सा ! प्रणाम सा ! अति सर्वत्र वर्जयेत् हम अपने जीवन के किसी भी क्षेत्र में देख ले अति का परिणाम अच्छा नहीं होता है । वर्तमान परिप्रेक्ष्य में मानव चिन्तन जो सर्वाधिक प्रचलित हैं वो यह हैं ...

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लेखक के बारे में
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Pradeep Chhajer

( वरिष्ठ , विशिष्ट , शान्त स्वभाव , अंतर्राष्ट्रीय साहित्यकार , शब्द साधक , शब्द महासागर ) ब्रिटिश बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में रचना प्रकाशित । व कई संस्थाओं से पुरस्कृत ।

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