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प्रतिलिपिगुरु पूर्णिमा का महत्व 1. गुरु के प्रति कृतज्ञता का पर्व यह दिन शिष्य अपने गुरु को स्मरण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। गुरु ही जीवन में अज्ञान के अंधकार से ज्ञान की ओर ले जाते हैं। "गुरु ...

डॉ. मनीष सक्सेना – प्रोफ़ाइल निदेशक – मार्गनिरूपणम् प्रतिनिधानम् प्रतिष्ठानम् प्राचार्य – टीचर्स ट्रैनिंग कॉलेज (शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय: 1997 से) शैक्षणिक एवं शोध योगदान • वैदिक शिक्षा, आत्महत्या प्रवृत्तियाँ, सोशल नेटवर्किंग, वैश्विक शिक्षा परिदृश्य एवं आध्यात्मिक उपलब्धि जैसे विषयों पर शोध। • 150 शोध-पत्र एवं आलेख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स/पत्रिकाओं में प्रकाशित। • “कायस्थ उद्धव: इतिहास एवं विकास” पुस्तक के लेखक। • 7 से अधिक शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि प्रदान करवाने में मार्गदर्शन। • अनेक विश्वविद्यालय के पत्राचार पाठ्यक्रम के निर्माण, लेखन व संशोधन में योगदान। सेमिनार एवं कॉन्फ्रेंस उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, वेबिनार, संगोष्ठियों और कॉन्फ्रेंस में सक्रिय भागीदारी की है। दर्शन, अध्यात्म और जीवन मूल्यों पर उनके व्याख्यान अत्यंत सराहे गए हैं। • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, वेबिनार एवं संगोष्ठियों में सहभागिता। • शिक्षा, अध्यात्म और सामाजिक सरोकारों पर आधारित विशेष सत्रों का संचालन किया। • दर्शन, अध्यात्म और शिक्षा पर व्याख्यान प्रदान किए। • अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रमों का सफल आयोजन। • मार्गनिरूपणम् प्रतिनिधानम् प्रतिष्ठानम् के अंतर्गत – o छात्रों में आत्महत्या प्रवृत्तियों की रोकथाम हेतु कार्यशालाएँ। o समाज में पनपती सांस्कृतिक विकृतियों को दूर करने हेतु संवाद। o सामाजिक एकता और मूल्य-आधारित जीवन पर विशेष कार्यक्रम। o ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों स्वरूपों में आयोजित कार्यशालाओं से लगभग 1500 विद्यार्थी लाभान्वित। o कार्यक्रमों का विस्तार कोटा, अजमेर और जयपुर संभाग तक सीमित नहीं रहा बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों तक पहुँचा। साहित्यिक योगदान • कवि, निबंधकार एवं समीक्षक के रूप में सक्रिय। • जीवन-मूल्य, सामाजिक सरोकार और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित कविताएँ। • “मृत्यु” उनका प्रिय विषय है, जिस पर अब तक लगभग 250 कविताएँ लिखी हैं। • अनेक साहित्यिक गोष्ठियों और राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संस्थाओं में सहभागिता। • समसामयिक विषयों पर निबंध लेखन एवं कई पुस्तकों की समालोचना। • कई राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थाओं के सदस्य। सदस्यता वे अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं के सक्रिय सदस्य हैं, जिनमें शामिल हैं – • Rajasthan Council of Educational Administration and Management, UDAIPUR (RCEAM) • ब्रूनो ग्रोनिंग सोसाइटी • महर्षि अरविंद सोसाइटी • परमहंस योगानंद सोसाइटी • विपश्यना सम्यक साधना समिति • कायस्थ जनरल सभा • अखिल भारतीय कायस्थ महासभा • उदयपुर विचार मंच • अखिल भारतीय साहित्यिक परिषद
डॉ. मनीष सक्सेना – प्रोफ़ाइल निदेशक – मार्गनिरूपणम् प्रतिनिधानम् प्रतिष्ठानम् प्राचार्य – टीचर्स ट्रैनिंग कॉलेज (शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय: 1997 से) शैक्षणिक एवं शोध योगदान • वैदिक शिक्षा, आत्महत्या प्रवृत्तियाँ, सोशल नेटवर्किंग, वैश्विक शिक्षा परिदृश्य एवं आध्यात्मिक उपलब्धि जैसे विषयों पर शोध। • 150 शोध-पत्र एवं आलेख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स/पत्रिकाओं में प्रकाशित। • “कायस्थ उद्धव: इतिहास एवं विकास” पुस्तक के लेखक। • 7 से अधिक शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि प्रदान करवाने में मार्गदर्शन। • अनेक विश्वविद्यालय के पत्राचार पाठ्यक्रम के निर्माण, लेखन व संशोधन में योगदान। सेमिनार एवं कॉन्फ्रेंस उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, वेबिनार, संगोष्ठियों और कॉन्फ्रेंस में सक्रिय भागीदारी की है। दर्शन, अध्यात्म और जीवन मूल्यों पर उनके व्याख्यान अत्यंत सराहे गए हैं। • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, वेबिनार एवं संगोष्ठियों में सहभागिता। • शिक्षा, अध्यात्म और सामाजिक सरोकारों पर आधारित विशेष सत्रों का संचालन किया। • दर्शन, अध्यात्म और शिक्षा पर व्याख्यान प्रदान किए। • अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रमों का सफल आयोजन। • मार्गनिरूपणम् प्रतिनिधानम् प्रतिष्ठानम् के अंतर्गत – o छात्रों में आत्महत्या प्रवृत्तियों की रोकथाम हेतु कार्यशालाएँ। o समाज में पनपती सांस्कृतिक विकृतियों को दूर करने हेतु संवाद। o सामाजिक एकता और मूल्य-आधारित जीवन पर विशेष कार्यक्रम। o ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों स्वरूपों में आयोजित कार्यशालाओं से लगभग 1500 विद्यार्थी लाभान्वित। o कार्यक्रमों का विस्तार कोटा, अजमेर और जयपुर संभाग तक सीमित नहीं रहा बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों तक पहुँचा। साहित्यिक योगदान • कवि, निबंधकार एवं समीक्षक के रूप में सक्रिय। • जीवन-मूल्य, सामाजिक सरोकार और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित कविताएँ। • “मृत्यु” उनका प्रिय विषय है, जिस पर अब तक लगभग 250 कविताएँ लिखी हैं। • अनेक साहित्यिक गोष्ठियों और राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक संस्थाओं में सहभागिता। • समसामयिक विषयों पर निबंध लेखन एवं कई पुस्तकों की समालोचना। • कई राष्ट्रीय साहित्यिक संस्थाओं के सदस्य। सदस्यता वे अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं के सक्रिय सदस्य हैं, जिनमें शामिल हैं – • Rajasthan Council of Educational Administration and Management, UDAIPUR (RCEAM) • ब्रूनो ग्रोनिंग सोसाइटी • महर्षि अरविंद सोसाइटी • परमहंस योगानंद सोसाइटी • विपश्यना सम्यक साधना समिति • कायस्थ जनरल सभा • अखिल भारतीय कायस्थ महासभा • उदयपुर विचार मंच • अखिल भारतीय साहित्यिक परिषद