अनुभूतियाँ जीवन की न जाने कैसी-कैसी कुछ खट्टी,कुछ मीठी कुछ तीखी-सी, कुछ जानी-पहचानी सी, नहीं लगती कभी बेगानी। दिल को छू जाती हैं जीवन की ये अनुभूतियाँ । अपने-पराए का भेद, करा देती है...

प्रतिलिपिअनुभूतियाँ जीवन की न जाने कैसी-कैसी कुछ खट्टी,कुछ मीठी कुछ तीखी-सी, कुछ जानी-पहचानी सी, नहीं लगती कभी बेगानी। दिल को छू जाती हैं जीवन की ये अनुभूतियाँ । अपने-पराए का भेद, करा देती है...