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अंकित

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जब अमन से फुर्सत मिलती ही नहीं है उर्वशी की बोलती बंद हो जाती है अर्शिया खिलखिला के हंस देती है बाकी उसे घुसते हुए बोलती है तू क्यों हंस रही है वह देख तेरा भी आशिक खड़ा हूं बुला रहा है रसिया इस बात ...