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अदृश्य साया (अदृश्य छाया)

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अदृश्य साया (अदृश्य छाया) रात के बारह बज रहे थे । पूरे गाँव में गहरी नींद नहीं थी, लेकिन नीलकंठ की आँखों में नींद नहीं थी । वह अपनी पुरानी हवेली के अवशेषों में खड़ी थी , जहां से दूर तक जंगल का अंधेरा ...

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Parmesh Patil
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