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अब तो तू आजा प्रिये

4.8
415

अब आया समझ में,मैं ना समझ नहीं प्यार हैं,चाहत हैं,उन्माद नहीं सूना-सूना सा जीवन है कुछ शोक नहीं,जीवन में तेरे सिवा कोई और नहीं अब इस दिल को कोई स्वीकार नहीं दिल मेरा हर बार तड़पता, तुझे चाहता अब तो तू ...

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लेखक के बारे में
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जयदीप दवे

विद्यार्थी।कविता,कहानी लेखन में रुचि। दिखता हूं गालिब(साधारण),कहते हैं कातिब,नाम में हैं दीप, हमारा परिचय जयदीप।

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    कमल श्रीचंदानी
    12 नवम्बर 2020
    खूबसूरत 🙏🙏 ।।। कृपया मेरी रचना "प्रिये तुम लौट आओ" पर भी नज़र डालें।।
  • author
    कुमार अभिनंदन
    07 मई 2019
    अच्छा है..
  • author
    विनोद कुमार दवे
    26 सितम्बर 2018
    सुंदर रचना 👌👌👌👌
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    कमल श्रीचंदानी
    12 नवम्बर 2020
    खूबसूरत 🙏🙏 ।।। कृपया मेरी रचना "प्रिये तुम लौट आओ" पर भी नज़र डालें।।
  • author
    कुमार अभिनंदन
    07 मई 2019
    अच्छा है..
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    विनोद कुमार दवे
    26 सितम्बर 2018
    सुंदर रचना 👌👌👌👌