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आज के परिवेश में -एकल या संयुक्त परिवार

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किसी ज़मीन के टुकड़े या मकान को घर नहीं कहते। जिस मकान में इंसान के साथ, उसकी उम्मीदें, उसके सपने, उसके अपने, सब मिलजुल कर रहते हैं उसे घर कहा जाता है। इसमें रहने वाले लोग इसे प्यार से ...

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suvidha gupta

पिछले साल लाॅकडाउन में समय पास करने के लिए कलम उठाई थी और देखते ही देखते कब पक्की दोस्त बन गई पता ही नहीं चला। अब तो एक दिन ना मिलूं तो कुछ अधूरा सा लगता है। हर रोज़ कुछ नया सीखती हूं और एक नए आत्मविश्वास से अगला दिन शुरू करती हूं। आप सभी के प्यार, विश्वास और सहयोग के लिए हार्दिक आभार। मेरी सभी कहानियों, ब्लॉग्स और कविताओं से संबंधित वीडियो देखने के लिए आप मेरे यूट्यूब चैनल पर जा सकते हैं। https://www.youtube.com/channel/UCkrHWnbxWbIfMJZ4BI0dbuw अन्य किसी जानकारी के लिए संपर्क करें: [email protected]

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