’आलेख’ ’’यादों की रोशनी में: जो बचा रहा’’ पीयूष पाचक ’स्मृति’ कहो या याद्दास्त दोनों का संबंध प्रमस्तिष्क के स्मरण से माना जा सकता है। मानव जीवन में इसका अहम् योगदान तो होना स्वभाविक है, वरना तो वह ...

प्रतिलिपि’आलेख’ ’’यादों की रोशनी में: जो बचा रहा’’ पीयूष पाचक ’स्मृति’ कहो या याद्दास्त दोनों का संबंध प्रमस्तिष्क के स्मरण से माना जा सकता है। मानव जीवन में इसका अहम् योगदान तो होना स्वभाविक है, वरना तो वह ...