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6. ) कविता- आजाद पंछी

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शबनम हैं, सुहाग हैं, मेरी शायरी की यह दूआं हैं। तख्त-ओ-ताज हैं, मेरी गज़ल का यह ख्वाब हैं।। जिकर उठे वो ख्वाब हैं, बगल में बैठी मेरी बोतल शराब हैं। जो मंजर हैं, मेरी जिंदगी का एक शबाब हैं।। ...

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