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क़ातिल लाशें

4.9
699

इंस्पेक्टर श्वेता ने एक बार फिर से अपने सामने पड़ी लाश को देखा। लाश बेहद ही वीभत्स अवस्था में थी। पूरा शरीर क्षत-विक्षत हो गया था। जगह-जगह काटने के निशान थे। कुछ जगह से मांस के लोथड़े बाहर निकल आये ...

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लेखक के बारे में

मुंशी सुमितचंद Visit Wreadom.in (अपनी पसंदीदा कहानियां पढ़ें।)

समीक्षा
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    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    वर्षा
    09 జూన్ 2022
    बहुत मजेदार कहानी। प्लाट बहुत बढ़िया लगा। मतलब मजदूरों का एक तरह से जॉम्बी में बदल जाना और कांड करना। बंद पड़ी माइन्स तो वैसे भी बहुत डरावनी लगती है। मुझे पहला शक श्वेता के पति पर हुआ। पता नहीं क्यों🤷 प्रखर ने जो मजदूरों के बारे में बताया उसे थोड़ा और विस्तार दे देते और मजा आ जाता। और भी कहानियाँ पढ़ी हैं मैंने हॉरर कहानी लेखन की। मुझे ये सबसे अच्छी लगी। मैं तो कहूँगी ऐसी ही कुछ और भी कहानी ले आइए। शुभकामनाएं
  • author
    Yogita Deepak joshi "Shivaya"
    08 జూన్ 2022
    🤤🤤🤤🤤🤤🤤🤤 डर गई सच में ही सफल प्रयास
  • author
    डॉ. शिव प्रताप
    08 జూన్ 2022
    बेहतरीन बहुत बढ़िया सही में सर आप जो भी लिखते हो कमाल का होता है 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
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    वर्षा
    09 జూన్ 2022
    बहुत मजेदार कहानी। प्लाट बहुत बढ़िया लगा। मतलब मजदूरों का एक तरह से जॉम्बी में बदल जाना और कांड करना। बंद पड़ी माइन्स तो वैसे भी बहुत डरावनी लगती है। मुझे पहला शक श्वेता के पति पर हुआ। पता नहीं क्यों🤷 प्रखर ने जो मजदूरों के बारे में बताया उसे थोड़ा और विस्तार दे देते और मजा आ जाता। और भी कहानियाँ पढ़ी हैं मैंने हॉरर कहानी लेखन की। मुझे ये सबसे अच्छी लगी। मैं तो कहूँगी ऐसी ही कुछ और भी कहानी ले आइए। शुभकामनाएं
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    Yogita Deepak joshi "Shivaya"
    08 జూన్ 2022
    🤤🤤🤤🤤🤤🤤🤤 डर गई सच में ही सफल प्रयास
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    डॉ. शिव प्रताप
    08 జూన్ 2022
    बेहतरीन बहुत बढ़िया सही में सर आप जो भी लिखते हो कमाल का होता है 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏