किसी ऊँचाई पर पहुचने के बाद एक इंसान खुद को अकेला पाता है, फिर वो औरों से क्या कहता है, वही इस कविता में दिखाने की कोशिश की है मैने, आप से अनुरोध है कि बताएं मेरी कोशिश कैसी रही ।

प्रतिलिपिकिसी ऊँचाई पर पहुचने के बाद एक इंसान खुद को अकेला पाता है, फिर वो औरों से क्या कहता है, वही इस कविता में दिखाने की कोशिश की है मैने, आप से अनुरोध है कि बताएं मेरी कोशिश कैसी रही ।