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व्यष्टि और परमेष्टि

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व्यष्टि,समष्टि, सृष्टि और परमेष्टि एक पूरा वर्तुल है व्यक्ति एक ओर समाज से जुड़ा है तो दूसरी तरफ सीधा परमेश्वर से परमेश्वर के निकट जितना सृष्टि है उतना ही निकट व्यक्ति भी समाज तो एक व्यवस्था है ...

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