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भाई -बहन

4.5
3554

आज अचानक ही आंख कुछ नम हो गई कारण, शायद कुछ नहीं पर बहुत कुछ था। याद आ गया वह बचपन जब हम भाई -बहन छोटी- सी बात पर ही झगड़ने लगते थे। पर अगले ही पल सब भूल कर हर खुशी हर चीज एक दूसरे से साझा करते थे । ...

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लेखक के बारे में
समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    डॉ. पूनम बनर्जी
    02 अगस्त 2024
    बेहतरीन! मेरे भी अपने भाइयों के साथ ऐसे ही रिश्ते थे और मुझे भी यही लगता है...... कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन 👍👍
  • author
    Samrat Gupta
    07 मार्च 2026
    एकदम अलग बचपन की आपने यादें ताजा कर दी धन्यवाद ऐसी रचना के लिए
  • author
    अरविन्द सिन्हा
    15 अप्रैल 2024
    अत्यन्त ही हृदयस्पर्शी सुन्दर कहानी । हार्दिक साधुवाद
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    डॉ. पूनम बनर्जी
    02 अगस्त 2024
    बेहतरीन! मेरे भी अपने भाइयों के साथ ऐसे ही रिश्ते थे और मुझे भी यही लगता है...... कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिन 👍👍
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    Samrat Gupta
    07 मार्च 2026
    एकदम अलग बचपन की आपने यादें ताजा कर दी धन्यवाद ऐसी रचना के लिए
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    अरविन्द सिन्हा
    15 अप्रैल 2024
    अत्यन्त ही हृदयस्पर्शी सुन्दर कहानी । हार्दिक साधुवाद