ओढ़कर जिम्मेदारी की चादर वो, आजादी का आंगन छोड़ चली अब तक बीते हर पल को यादों में संजो कर देखो, बहन पिया घर चली। खामोश हुआ चहचहाता, अब ये आँगन इसलिये कि, वो चिड़िया पिया घर उड़ चली। जिन्दगी की हर रीत ...

प्रतिलिपिओढ़कर जिम्मेदारी की चादर वो, आजादी का आंगन छोड़ चली अब तक बीते हर पल को यादों में संजो कर देखो, बहन पिया घर चली। खामोश हुआ चहचहाता, अब ये आँगन इसलिये कि, वो चिड़िया पिया घर उड़ चली। जिन्दगी की हर रीत ...