कपकोट के सबसे आखिरी गाँव में रहती थी गीता। 16 साल की, पर आँखों में 60 साल का दर्द। पिता 5 साल पहले टीबी से गुज़र गए थे। माँ दूसरों के घर बर्तन माँजकर 4 रोटी का जुगाड़ करती। घर में एक जली हुई डिबिया,...
कपकोट, बागेश्वर से | पहाड़ की बेटी ✒️🏔️
दिल से लिखती हूँ, दर्द से नहीं हारती |
"गीता - पहाड़ की अनदेखी उड़ान" की लेखिका |
Insta: @pahadkibeti | DM for collab 💚
सारांश
कपकोट, बागेश्वर से | पहाड़ की बेटी ✒️🏔️
दिल से लिखती हूँ, दर्द से नहीं हारती |
"गीता - पहाड़ की अनदेखी उड़ान" की लेखिका |
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