
प्रतिलिपिउसने धीमे, लगभग सपाट स्वर में कहा, “...अगर ऐसा है तो हमें फिर बात भी नहीं करनी चाहिए।” कमरे में खामोशी फैल गई। वो उसे देखती रही, जैसे ये समझने की कोशिश कर रही हो कि ये बात थी, या फैसला। थोड़ा झिझककर उसने पूछा, “क्या इतनी बड़ी बात है ये?” उसने हल्का सा सिर झुकाया, नज़रें उससे हटाकर, “तुम्हारे लिए शायद नहीं है।” वो तुरंत सीधी हुई, जैसे खुद को संभाल रही हो, “मैंने तुमसे कभी झूठ नहीं बोला… मैं बस खुल नहीं पाती।” इस बात पर उसने थकी हुई मुस्कान से कहा, “हाँ...शायद तुमने झूठ नहीं कहा होगा...मगर अधूरा ...
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या
रिपोर्ट की समस्या