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जस्ट इन केस ऑफ इमरजेंसी

4.7
8532

A relationship between a mother and a son!!!

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लेखक के बारे में
author
Harish Pandey

"बेधड़क सा जियूँ, बेफिकर सा रहूँ... हो रसूख़ यूँ मेरा, जैसे जिस्म में लहू!!!"

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    Alka Trivedi
    01 ജനുവരി 2020
    गागर में सागर
  • author
    Samriddhi Raj
    04 ജൂണ്‍ 2022
    OMG! अब क्या ही कहूं इस रचना के लिए! बस इतना ही कहूंगी कि जितने मन से आपने इसे लिखा है, उतना ही गहराई से इसने हमारे मन पर अपनी छाप छोड़ी है। एक मां हूं, इसलिए समझती हूं मां का त्याग कैसा होता है। बेहद सुंदर और सजीव रचना👏👏👌👌💐💐💐
  • author
    UMA SHARMA "अर्तिका"
    18 സെപ്റ്റംബര്‍ 2020
    सच में मां आपको जितनी अच्छी तरह से जानती और पहचानती है ये काम कोई और नहीं कर सकता है। कहानी बढ़िया लिखी गई है।
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    Alka Trivedi
    01 ജനുവരി 2020
    गागर में सागर
  • author
    Samriddhi Raj
    04 ജൂണ്‍ 2022
    OMG! अब क्या ही कहूं इस रचना के लिए! बस इतना ही कहूंगी कि जितने मन से आपने इसे लिखा है, उतना ही गहराई से इसने हमारे मन पर अपनी छाप छोड़ी है। एक मां हूं, इसलिए समझती हूं मां का त्याग कैसा होता है। बेहद सुंदर और सजीव रचना👏👏👌👌💐💐💐
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    UMA SHARMA "अर्तिका"
    18 സെപ്റ്റംബര്‍ 2020
    सच में मां आपको जितनी अच्छी तरह से जानती और पहचानती है ये काम कोई और नहीं कर सकता है। कहानी बढ़िया लिखी गई है।