"माँ मैं खेलने जाऊँ ? " उस महीन जालीदार टाट के एक कोने से झांकते हुए उसने पूछा । " नही सुनयना" दो टूक जवाब देकर वो फिर से मसरूफ़ हो गयी अपनी होठों की रंगत को चटक करने में । आँखों में आज भी सुरमा ...

प्रतिलिपि"माँ मैं खेलने जाऊँ ? " उस महीन जालीदार टाट के एक कोने से झांकते हुए उसने पूछा । " नही सुनयना" दो टूक जवाब देकर वो फिर से मसरूफ़ हो गयी अपनी होठों की रंगत को चटक करने में । आँखों में आज भी सुरमा ...