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कामवाली की तलाश में (ई-बुक/हास्य-व्यंग्य)-कामवाली की तलाश में
जितेन्द्र 'जीतू'
5
मैं जैसे ही कमरे में घुसा, माँ ने अल्टीमेटम दे दिया- या तो शादी कर लो या फिर कोई कामवाली ढूँढ लाओ। मुझसे अब चौका बर्तन नहीं होता। मैं तुरन्त घरवाली का स्थानापन्न ढूँढने निकल पड़ा। पहले चरण में मैं अपने मित्र के पास पहुँचा और उसे अपनी व्यथा बतलाई। उसने मुझे आश्वस्त किया। बोला, घर जाकर आराम करो। कामवाली पहुँच जायेगी। मैं संतुष्ट होकर लौट आया। माँ को मैंने बतला दिया कि कामवाली मिल गयी है, अब रिश्ते ढूँढने बंद कर दो। अगले दिन एक औरत सी दिखने वाली मेरे घर पहुँची। माँ ने सोचा कि किसी कन्या की माँ आई ...
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बधाई हो! कामवाली की तलाश में (ई-बुक/हास्य-व्यंग्य)-कामवाली की तलाश में (ई-बुक/हास्य-व्यंग्य) प्रकाशित हो चुकी है।. अपने दोस्तों को इस खुशी में शामिल करे और उनकी राय जाने।
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